मंगलवार, 22 अप्रैल 2008

तीन देवियां, तिरासी कन्फ्यूज़न!

मूलत: आलसी होने के कारण मैं भाग्यवादी हूं। बचपन से मैंने हर उस ज्योतिषी में श्रद्धा दिखाई है जो सलाह देता था कि 'अभी कुछ मत करो', वक़्त ठीक नहीं है। अख़बार में आने वाले हर उस राशिफल को मैंने तहेदिल से कुबूल किया है जो कहता था आज कोई नया 'काम शुरू न करें'!

मगर किसी एक ज्योतिषी और एक अख़बार की भविष्यवाणी को मानने मे दिक़्कत ये है कि अगर वो 'कुछ करने' के लिए कह दे, तो किस मुंह से नकारुं! आख़िर अंतरात्मा की आवाज़ भी कोई चीज़ है! वैसे भी ऐसे मौकों पर वो और लाउड हो जाती है।

बहरहाल, इस बीच मुझे मिलीं तीन देवियां। कामचोरी का उन्होंने मुझे वो स्कोप दिया जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था। पहले तो इन्होंने मुझमें इस बात का गौरव जगाया कि तुम्हारे पास खर्च करने के लिए भले ही एक भी राशि न हो लेकिन सुनने के लिए तीन-तीन हैं!

तीन देवियों में पहली बताती है कि अगर आप फलां-फलां महीने में धरती पर कहर बन कर बरपे थे, तो आपकी ये राशि है। और इस के हिसाब से आज आप झंडे गाड़ेंगें, किले फतेह करेंगे, हर जगह लाल कालीन बिछे हैं, दरवाजे खुले हैं। टाइम वेस्ट न करें। मुंह-हाथ धोयें, चाय में डुबो दो बिस्किट खायें और काम पर जायें। वो 'करने की सलाह' दे रही है और मेरा दम घुटने लगा है!


लेकिन, इतनी देर में दूसरी देवी प्रकट होती है। ये बताती है डियर, दिल छोटा मत करो। जन्म का महीना भूल जाओ। मैं नाम के आधार पर भविष्य बताऊंगी और वादा करती हूं पहली वाली को सौ फीसदी कॉन्ट्राडिक्ट करुंगी। वो सब्ज़ बाग दिखाती है तो मैं गाज गिराऊंगी। वो करने के लिए कहती है, तो मैं न करने की हिदायत दूंगी!

सच मानिये दोस्तों, इन दोनों ने आज तक कभी निराश नहीं किया। और कभी किया भी है तो तीसरी देवी हर बार मेरी लिये लाइफ लाइन साबित हुई है। ये जन्मांक की बात करती है और उसी हिसाब से ज्ञान देती है, लेकिन जो उपाय ये बताती हैं, उसके लिए मैं इनका बहुत बड़ा फैन हूं।

मसलन, आज आपका दिन ठीक नहीं है और अगर इसे ठीक करना है तो घर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में हरे रंग की ईंट रख उस पर नीले रंग का दिया जलायें, लाल रंग के कुत्ते को ग्रिल्ड सैंडविच खिलायें, दही में थोड़ी चाय पत्ती डाल उसका घोल बनायें और तीन-तीन चम्मच सुबह शाम पियें। और अगर इसके बाद भी ज़िंदा बच गये तो रात को हमारा कार्यक्रम फिर से देखें!


नीरज बधवार

3 टिप्‍पणियां:

अल्पना वर्मा ने कहा…

'अगर इसके बाद भी ज़िंदा बच गये तो रात को हमारा कार्यक्रम फिर से देखें!''

बहुत बढ़िया --
बहुत ही irritating कार्यक्रम है...यहाँ तीन देवियाँ हैं दुसरे चॅनल पर बोले तारे!वहाँ भी शायद तीन देवियाँ ही हैं--
रात बारह बजे! क्या समय चुना है!
बहुत बढ़िया चिड- फाड़ की आपने!:)

सागर नाहर ने कहा…

हरे रंग की ईंट..?
नीले रंग का दिया..?
दही में चाय की पत्ती?
लाल रंग का कुत्ता..?
हे भगवान अब इन सब का बंदोबस्त कहां से करूं.. प्लीज आप उन देवी जी से पूछीये ना कि ये सारा सामान कहाँ से मिलेगा?
वे दूसरी वाली देवीजी कहीं इन सामान की दुकान तो नहीं चलातीं?
मजेदार.. बहुत हंसी आ रही है।

srigovind ने कहा…

padh ker muskuraye bina nahi rah saka aap bahut achhe vyang kaar hai sidhi bhasha me samudra ki gahraye naapne ki takat hai .