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शुक्रवार, 14 मई 2010

नग और नगीने!

वक़्त आ गया है कि क्रिकेट की हार को हम क्रिकेटीय कारणों से आगे बढ़ कर देखें। बहुत हो चुका ये कहते-कहते कि हमारे गेंदबाज़ों की गति कुछ ब्लैक एंड व्हाइट हिंदी फिल्मों से भी धीमी है, फील्डिंग देश की कानून-व्यवस्था से भी लचर है और शॉर्ट पिच गेंदें देख बल्लेबाज़ों की तकनीक में शॉर्ट सर्किट हो जाता है। वक़्त आ गया है कि शोध करें कि कहीं इसके पीछे ज्योतिषय, खगोलिय या वास्तुशास्त्रीय कारण तो ज़िम्मेदार तो नहीं। जिन बल्लेबाज़ों को हम तेज़ गेंदबाज़ी न खेल पाने के लिए अरसे से कोस रहे हैं, ऐसा तो नहीं कि उनका शनि ठीक न चल रहा हो। पैदल गेंदबाज़ किसी ग्रह की वक्रीय चाल से बेहाल हों या फिर कैच छोड़ने वाला खिलाड़ी खुद किसी ग्रह की गिरफ्त में हो।

वक़्त आ गया है कि बीसीसीआइ सभी क्रिकेट खिलाड़ियों की कुंडलिया मंगवाए। पैसे को व्यर्थ बताने वाले कुछ बडे़ पंडितों को अनाप-शनाप पैसा दे हायर किया जाए। वो देखें कि गड़बड़ी कहां है। वास्तुशास्त्रियों से खिलाड़ियों के घर का मुआयना करवाया जाए। ये देखा जाए कि जो गेंदबाज़ फील्ड प्लेसमेंट के हिसाब से गेंद नहीं करता उसके घर में किन-किन सामानों की प्लेसमेंट ग़लत है। अंगदनुमा फुटवर्क के चलते पगबाधा होने वाले बल्लेबाज़ के रास्ते में, कही ग़लत जगह रखा उसका डब्ल बैड तो बाधा नहीं।


साथ ही बीसीसीआइ ये भी सुनिश्चित करे कि समस्याओं का जल्द निपटारा हो। खिलाड़ियों को झाड़ा लगवाने से लेकर उनके लिए बाज़ार में अच्छे नग तलाशने का काम वो खुद करे। खिलाड़ियों को ईस्ट फेसिंग मकान दिलवाएं। सत्यनारायण की कथा करवाए। कालसर्प योग कराए। जो कुछ हो सकता है वो करे। मुझे पक्का यकीन है कि ठीक नग पहन कर हमारे नगीने ठीक से खेलने लगेंगे। और आख़िर में विपक्षी खिलाड़ी बुरा खेलें इसके लिए किसी तांत्रिक की सेवाएं भी ली जा सकती है।