बुधवार, 25 मार्च 2009

नैनो के बाद की दुनिया (हास्य-व्यंग्य)



बोलचाल की ज़ुबान में एक शब्द अक्सर इस्तेमाल होता है 'रेड़ पीटना'। मतलब किसी चीज़ को इस हद तक इस्तेमाल करना कि उसकी खूबसूरती चली जाए और उसे देखने-सुनने तक से एलर्जी हो। जैसे ग़ालिब के शेरों का अख़बारों और टीवी की हैडलाइन्स में इतना इस्तेमाल हुआ है कि खूबसूरत से खूबसूरत शेर सुनने में भी कोफ्त होती है। नैनो औपचारिक रूप से लांच हो चुकी है और जल्द ही हम सबके 'हाथ' में होगी। अब भारतीय परम्परा और आदत से मुताबकि मैं साल भर में नैनो की रेड़ पीटती देख रहा हूं। कुछ सम्भावित आशंकांए मुलाहिज़ा फरमाएं।


1.नैनों को लेकर आपका इंतज़ार बढ़ता जा रहा है। गाड़ियां कम हैं और खरीददार ज़्यादा। इस बीच आपको पता चलता है कि दिल्ली के गफ्फार मार्केट में 50 हज़ार की चाइनीज़ नैनो मिल रही है। असली नैनो के मुकाबले इसमें कई दिलचस्प फीचर हैं। पेट्रोल डालने का झंझट नहीं। बैटरी से चलने वाली नैनो। किसी भी मोबाइल चार्जर से चार्ज होने वाली नैनो। आप खुशी-खुशी ख़रीद लेते हैं। और फिर एक रोज़ दरवाज़ा टूटने पर आपको पता चलता है.. अरे...इसमें तो थर्मोकॉल भरा हुआ है।


2. आप घर से निकल कर सामने वाली सड़क पर पहुंचते हैं। यहां वहां देखा। क्या हुआ... कोई नज़र नहीं आ रहा। अरे.. यहीं तो रहते थे... कहां चले गए। तभी आपकी नज़र अपने दांईं तरफ पेड़ के नीचे पड़ती है। एक साथ छे-सात नैनो खड़ी है। आप गाड़ी के नज़दीक जाते हैं। उसके अंदर झांकते हैं। एक शख्स गले में गमछा डाले, दोनों पांव सीट पर रख, खैनी लगा रहा है। आपने इसे पहले कई बार देखा है। आप उसे पहचानने की कोशिश करते हैं। अरे..भईया तुम...जी बाऊजी मैं...और तुम्हारा रिक्शा...वो तो मैंने काफी दिन हुए बेच दिया। और ये गाड़ी...'कुछ पैसे और डालकर' कल ही ख़रीदी है।


3. इसी तरह नैनो और बहुतों के 'रीच' में आ जाएगी। सब्ज़ी वाली रेहड़ी, कुल्फी वाली रेहड़ी और टिक्की वाली रेहड़ी..क्रमशः सब्ज़ी वाली नैनो, कुल्फी वाली नैनो और टिक्की वाली नैनो में तब्दील हो जाएगी। मां का पल्लू पकड़ कर बच्ची ज़िद्द कर रहा है... मम्मी दस रूपये दो न, चाऊमीन वाली नैनो आई है।


4. सड़क पर नैनो की तादाद बढ़ने लगेगी। ज़ाहिर है गाड़ियां बढ़ेंगी तो हादसे भी बढ़ेंगे। जिस तरह ट्रक से ट्रक भिड़ जाते हैं। उसी तरह नैनो से नैनो भी भिड़ेंगी। ऐसे में इस तरह की हैडलाइन्स आम हो जाएंगी....'नैनो से नैनो भिड़ी'..दिल तो नहीं मिले, दो की टांग ज़रूर टूट गई। 'नैनो से टक्कर में दो ने नैन गंवाए।' नैनो की बढ़ती तादाद से सड़क पर यहां-वहां चेतावनी लिखी रहेगी। 'सड़क पर चलते वक़्त नैनो का इस्तेमाल करें वरना नैनो के नीचें आ जांएगें।'


5.इस बीच घरों में इस तरह के दृश्य देखने को मिलेंगे। बीवी, पति को उसकी कंजूसी के लिए ताने दे रही है। पति, वर्तमान के खर्चों और भविष्य की ज़िम्मेदारियां गिना अपनी कंजूसी जस्टिफाई कर रहा है। पत्नी को समझा रहा है डियर, साल भर और इंतज़ार कर लो। मैं वादा करता हूं तुम्हें सैकिंड हैंड नैनो ज़रूर दिला दूंगा। दो-चार बैंक से तो मैंने फाइनेंस के लिए बात भी कर ली है। मगर बीवी उसकी एक नहीं सुन रही। इस बीच डोर बैल बजती है। डिंग-डांग....अरे गंगूबाई तुम...आज इतनी जल्दी कैसे...मेमसाहब वो क्या है न..आज मेरा हसबैंड मुझे ड्राप कर गया है...वो कल ही गाडी खरीदा है...इसलिए मैं जल्दी आई। ये सुन कंजूस पति के ज़हन में ख़तरे की घंटी बजती है। इससे पहले कि मेरी बीवी मुझे ड्राप कर दें, मुझे भी नैनो खरीद लेनी चाहिए।


6. ये साफ है कि टाटा की नैनो से मुकाबले के लिए बाकी कम्पनियां भी छोटी सस्ती गाडियां लाएंगी। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो हो सकता है इसके दाम और नीचे आ जाएं। ऐसा हुआ तो आपको नैनो हर जगह दिखाई देगी। पनवाडी से पान ले आपने उसे बीस का नोट दिया। वो कहता है साब खुल्ले हो तो दे दो। आपका कहते नहीं है। वो कहता है सर, पान के साथ एक नैनो बांध दूं। आप बिदकते हैं। अरे, छोड़ो पहले ही घर में बहुत पड़ी हैं।


और अगर वाकई ऐसा हुआ तो नैनो शो रूम से निकल कर देश भर हॉट बाज़ारों में पहुंच जाएगी। पुराने कपड़ों के बदले बर्तन देने वाले भी नैनो रखने लगेंगे। पति की दो पुरानी पैंटों के बदले आपको नैनो मिल जाएगी। 'बिलो नैनो लाइन' जैसे जुमले चर्चित हो जाएंगे। सर्वेंट क्वॉटर की तरह सर्वेंट पार्किंग की मांग उठने लगेगी। लोग गैस्ट रूम की तरह घरों में अलग से गैस्ट कार रखेंगें। चुनावों में नोट के बदले नैनों बांटी जाएगी। नेता नोट के बदले चाबियां बांटते पकड़े जाएंगें। गरीब के झोपड़े के बजाए लोग गरीब की गाडी में बैठ फोट खिंचावाएंगे। समाज, नैनो और ग़ैर नैनो वालो में बंट जाएगा।

9 टिप्‍पणियां:

आलोक सिंह ने कहा…

जय हो नैनो की माया , हर जगह व्याप्त हो जायेगी . अगर ऐसा हो गया तो पार्किग और सडको का क्या होगा , आदमी गाड़ी से जल्दी पैदल पहुँच जायेगा (जाम जो होगा ).पार्किग के लिए जगह नहीं होगी लोग बड़ी गाडियों पर पार्किग बनवा कर सड़क के किनारे लगा देगे .

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

इस छत पर घास लगाकर

यदि सचमुच में पार्क बना

दिया जाए तो पार्क और

पार्किंग के लिए कहीं और

नहीं जाना होगा।

नवभारत टाइम्‍स में भी प्रकाशन के लिए बधाई।

कुश ने कहा…

'सड़क पर चलते वक़्त नैनो का इस्तेमाल करें वरना नैनो के नीचें आ जांएगें।'

is line ke liye to aapko 100 no.

रंजना ने कहा…

सड़क पर नैनो की तादाद बढ़ने लगेगी। ज़ाहिर है गाड़ियां बढ़ेंगी तो हादसे भी बढ़ेंगे। जिस तरह ट्रक से ट्रक भिड़ जाते हैं। उसी तरह नैनो से नैनो भी भिड़ेंगी। ऐसे में इस तरह की हैडलाइन्स आम हो जाएंगी....'नैनो से नैनो भिड़ी'..दिल तो नहीं मिले, दो की टांग ज़रूर टूट गई। 'नैनो से टक्कर में दो ने नैन गंवाए।' नैनो की बढ़ती तादाद से सड़क पर यहां-वहां चेतावनी लिखी रहेगी। 'सड़क पर चलते वक़्त नैनो का इस्तेमाल करें वरना नैनो के नीचें आ जांएगें।'


क्या कहूँ.....मजा आ गया......हंसते हंसते पेट में बल पड़ गए.....लाजवाब !!! सिम्पली ग्रेट !!!

संगीता पुरी ने कहा…

बेहद मजेदार लगी आपकी रचना ...

शेफाली पाण्डे ने कहा…

bahut achchi lagee....

शेफाली पाण्डे ने कहा…

bahut achchi lagee....

Fighter Jet ने कहा…

bahut sahi likha hai...!

nanao ka wahi hoga jo TATA ke baki gadiyo ka hota hai..taxi/auto ban jayegi.

ab jab badi gadi nahi le sakte...to kyon na gadi ko hi chota kar diya jaye.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

निसंदेह ,बहुत अच्छा लिखा है आपने नैनो के बारे मे ,हम ने कुछ आइडिया पिरोए है
अगर आप के पास थोड़ा हँसने का और वक्त हो तो मेरे ब्लॉग पे जाकर देखिए
गारंटी है आप को मज़ा आएगा नैनो के बारे मे पढ़ कर.....