रविवार, 17 मई 2009

विज्ञापन जो प्रकाशित न हो सका! (हास्य-व्यंग्य)

जिस तरह के चुनावी नतीजे आए हैं उसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। एक राष्ट्रीय पार्टी ने तो बाकायदा नतीजों के बाद समर्थन जुटाने के लिए विज्ञापन भी लिखवा लिया था। इसके पीछे मंशा ये थी कि खुद किसी से सीधे सम्पर्क करने के बजाए विज्ञापन के माध्यम से संभावित साथियों तक पहुंचा जाए। इससे जोड़-तोड़ का आरोप भी नहीं लगेगा और काम भी हो जाएगा। मगर जैसे नतीजे आए उसके बाद इसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ी। फिर भी ये देखते हुए कि कॉपी लिखने वालों ने इतनी मेहनत की और भविष्य में शायद ये किसी के काम आ सके, अप्रकाशित विज्ञापन की मूल कॉपी यहां दी जा रही है। गौर फरमाएं-


विज्ञापन का शीर्षक है-बुला रही है भारत मां। आगे की भाषा ज्यों की त्यों यहां दी जा रही है। हम, देश सेवा पार्टी, जो पिछले कई सालों से देश सेवा के धंधे में हैं, ये बताने में अत्यंत हर्ष महसूस कर रहे हैं कि पार्टी के आला नेताओं ने फिर से पांच साल के लिए देश सेवा का ठेका लेने का मन बनाया है। इसके लिए हमें दिल्ली हेड ऑफिस में डेढ़ सौ से दो सौ सांसदों की ज़रूरत है। किसी भी पार्टी और विचारधारा से जुड़े सांसद बेझिझक अप्लाई कर सकते हैं।

भर्ती के मानदंडों को लेकर हम काफी उदार हैं। न तो अतीत में हमें दी गालियों पर हम आपसे जवाब मांगेंगे और न ही ये पूछ शर्मिंदा करेंगे कि पिछले पांच साल में आपने पंद्रह पार्टियां क्यों बदली। हमें सिर्फ आपका समर्थन चाहिए। हमसे जुड़ने से पूर्व आपका राजनीतिक जीवन हमारी नज़र में आपका निजी जीवन है और पेशेवर पार्टी होने के नाते हमें आपके निजी जीवन से कोई सरोकार नही हैं।

आपका सांसद बनना अपने आप में ही आपकी काबिलियत का प्रमाण है और देश सेवा पार्टी ये बात अच्छे-से समझती है कि हर काबिल आदमी को उसकी कीमत मिलनी चाहिए। इस मामले में आप बेफिक्र रहें, जो शख़्स अपना अमूल्य समर्थन दे हमें देश सेवा का मौका दे रहा है उसकी कोई भी मांग हमारे लिए नाजायज़ नहीं होगी। वैसे भी दस-बीस करोड़ रूपये या एक-आध कैबिनेट पद ‘राजनीतिक स्थिरता’ के सामने कोई मायने नहीं रखता। पेमेंट को लेकर हमारा पिछला रिकॉर्ड भी शानदार रहा है। ज़रूरत पड़ने पर जिन-जिन लोगों ने आज तक अपनी पार्टी को दगा दे, हमें समर्थन दिया है हमने उन सभी को शानदार पेमेंट किया है। आप चाहें तो हमारी कस्टमर केयर यूनिट से नम्बर ले ऐसे लोगों से बात कर सकते हैं। हमारे यहां अलग से एक फाइनेंस सैल भी है जो बाकायदा आपको बताएगी कि समर्थन के एवज़ में मिले दो नम्बर के पैसे को कैसे एडजस्ट किया जाए।

समर्थन की कीमत पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धियों को निपटाने के भी सारे विकल्प हमारे यहां खुले हैं। अगर आपको लगता है कि फलां राज्य के मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर वहां फिर से चुनाव करवाएं जाएं तो हम धारा 356 पर भी विचार कर सकते हैं। सत्ता में आने पर हमारे पास सीबीआइ भी होगी। आप जिसके ख़िलाफ जैसी कहेंगे, वैसी जांच बिठवा देंगे। खुद आपके खिलाफ चल रहे सत्रह हज़ार मामलों में आपको सत्रह दिनों में क्लीन चिट दिलवा देंगे।

इसके अलावा हमारे यहां ‘ज्वाइन टू, गैट वन फ्री’ का ऑफर भी है। अगर आप दो और सांसदों का समर्थन दिलाते हैं तो उन दोनों को दी जाने वाली रक़म का पचास फीसदी आपको कमीशन के रूप में मिलेगा। ऐसी ज्वाइनिंग करवाने पर आपसे अलग से कोई बांड भी नहीं भरवाया जाएगा। मतलब आपका भर्ती करवाया सांसद अगर कहीं और चला जाता है तो आपको लेबर कोर्ट नहीं घसीटा जाएगा।

इस मौके पर हम गठबंधन के पूर्व साथियों और ऐसे बागियों से अपील करना चाहेंगे, जो इस बार चुनाव जीत कर आए हैं, कि पुराने गिले-शिकवे भुलाकर हमारे साथ आ जाएं। आप हमें भी घटिया मानते हैं और हमारे विरोधियों को भी। नए सिरे से नए घटिया लोगों से जुड़ने से अच्छा है आप हमसे जुड़ें। कम से कम हमारे घटियापन का आपको अनुभव तो है। उनके साथ जुड़कर पछताने से अच्छा है आप हमारे साथ जुड़कर पछताएं। इसी बहाने ये भ्रम भी बना रहेगा कि उनके साथ गए होते तो अच्छा रहता। एक मीठे भ्रम के सहारे जीवन बिता देने से बेहतर भला और क्या हो सकता है। कम उम्र में ये जान लेना कि ‘सब मिथ्या है’, जीना दुश्वार कर देता है। मित्र, जीवन को आसान बनाओ और हमारे साथ आओ। नीचे नम्बर दिया गया है फोन कर लेना और अगर खुद बात करने में शर्म आए तो मिस कॉल कर देना, हमारा लड़का पलट कर फोन कर लेगा।

6 टिप्‍पणियां:

RAJ ने कहा…

Realy very nice .....It applies on all parties.....

रंजन ने कहा…

:)

virendra ने कहा…

shukra hai ye party jiti nahi.. :)

अभिषेक ओझा ने कहा…

हा हा ! बिल्कुल सही. वैसे ये विज्ञापन आपके हाथ कहाँ से लग गया :) हमारी पार्टी बनने दीजिये आपसे ही लिखवायेंगे :)

Mired Mirage ने कहा…

बहुत खूब!इसमें ही शब्दों की थोड़ी हेरफ़ेर कर अलग अलग रंगों के कागज पर यह विज्ञापन सबने छपवाया था।
घुघूती बासूती

Fighter Jet ने कहा…

ha ha ha...bahut sahi vigyapan tha..afsoos partiyon ki mehnat pe pani fir gaya :)